Monday, 5 June 2017

पानी की बूँद

कभी गगन से से आती
धरती से टकराती है
टूट-टूट कर बिखर-बिखर
आपस में मिल जाती है
बूँद बूँद में प्यार है इतना
दुश्मन नही बनाती

नदियों नालों में क्रंदन करती
सागर को मिल जाती है
पथ में आये कष्टों से
कभी नहीं घबराती
बूँद बूँद में इतनी शक्ति
शैल को पिघला जाती

टकराती इठराती बलखाती
हंसती खिलखिलाती जाती
बिना रुके बिना थके
बस चलती जाती
बूंद-बूंद में इतनी शक्ति
धरा जीवंत बना जाती

बूँद बूँद में प्यार है इतना
दुश्मन नही बनाती
बस जीवों के जीवन पर
खुद को अर्पण कर जाती
बूँद बूँद.....

   मार्तण्ड
9455502007
9455080809

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