Monday, 5 June 2017

शेर

रुखसत-ए-इश्क ने दो बूँद छलकाया जहाँ
उस धरा की आम्रपाली आशिकों को चाहिए

जो बड़े खुद्दार थे वो आज घुठनों पर खड़े
प्यार ने लूटा है उनको प्यार करना चाहिए

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