सर फरस्ती में बड़ा मगशूल देखा कानपुर दुश्मनों की रूह को गमनीन देखा कानपुर । आज वो भी बच न पाया जो कभी मगरूर था मसहूर कायर था कभी शायर बनाया कानपुर ।।
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