Saturday, 17 December 2016

स्वाभिमान


प्रचंड शौर्य वंश हो
कलंक फिर लगे नहीं
अमर्त्य दीपदान हो
सुमति भले बने नहीं ।।---1

सम्पूर्ण ब्रम्हाण्ड में
रोष आज व्याप्त है
समाजवाद  कुचक्र
देख क्षुब्ध हैं सभी ।।---2

सहस्र जयचंद हैं
लोभियों के संग है
सभी का सर विच्छेद कर
राष्ट्र को बचा अभी।।।---3

हाथ में त्रिशूल हो
चक्र गदा शूल होल।
पापियों का नाश कर
धर्म का प्रसार कर ।।---4

'मार्तण्ड'™ से भी तीव्र
दैदीप्यमान हो
सर्व शक्तिमान हों
कार्य यूँ करे सभी ।।---5

अखंड आर्यवर्त की
सनातने परम्परा
प्रथम पूज्य मातृ तुल्य
जननी भारती नमः।।---6

राष्ट्रवादी कवि
रजनीश 'मार्तण्ड'
9455502007



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