सर फरस्ती में बड़ा मगशूल देखा कानपुर
दुश्मनों की रूह को गमनीन देखा कानपुर ।
आज वो भी बच न पाया जो कभी मगरूर था
मसहूर कायर था कभी शायर बनाया कानपुर ।।
Monday, 26 December 2016
Saturday, 17 December 2016
स्वाभिमान
प्रचंड शौर्य वंश हो
कलंक फिर लगे नहीं
अमर्त्य दीपदान हो
सुमति भले बने नहीं ।।---1
सम्पूर्ण ब्रम्हाण्ड में
रोष आज व्याप्त है
समाजवाद कुचक्र
देख क्षुब्ध हैं सभी ।।---2
रोष आज व्याप्त है
समाजवाद कुचक्र
देख क्षुब्ध हैं सभी ।।---2
सहस्र जयचंद हैं
लोभियों के संग है
सभी का सर विच्छेद कर
राष्ट्र को बचा अभी।।।---3
लोभियों के संग है
सभी का सर विच्छेद कर
राष्ट्र को बचा अभी।।।---3
हाथ में त्रिशूल हो
चक्र गदा शूल होल।
पापियों का नाश कर
धर्म का प्रसार कर ।।---4
चक्र गदा शूल होल।
पापियों का नाश कर
धर्म का प्रसार कर ।।---4
'मार्तण्ड'™ से भी तीव्र
दैदीप्यमान हो
सर्व शक्तिमान हों
कार्य यूँ करे सभी ।।---5
दैदीप्यमान हो
सर्व शक्तिमान हों
कार्य यूँ करे सभी ।।---5
अखंड आर्यवर्त की
सनातने परम्परा
प्रथम पूज्य मातृ तुल्य
जननी भारती नमः।।---6
सनातने परम्परा
प्रथम पूज्य मातृ तुल्य
जननी भारती नमः।।---6
राष्ट्रवादी कवि
रजनीश 'मार्तण्ड'
9455502007
रजनीश 'मार्तण्ड'
9455502007

Thursday, 15 December 2016
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