Monday, 26 December 2016

कानपुर

सर फरस्ती में बड़ा मगशूल देखा कानपुर
दुश्मनों की रूह को गमनीन देखा कानपुर ।
आज वो भी बच न पाया जो कभी मगरूर था
मसहूर कायर था कभी शायर बनाया कानपुर ।।

जय हिन्द

जीवन मिलता जहाँ अमन
भारत माता का आँगन
नित खून कि नदिया बहती है
नित कष्ट सहे धरती व् गगन ।

जय हिन्द

रजनीश मार्तण्ड

Saturday, 17 December 2016

स्वाभिमान


प्रचंड शौर्य वंश हो
कलंक फिर लगे नहीं
अमर्त्य दीपदान हो
सुमति भले बने नहीं ।।---1

सम्पूर्ण ब्रम्हाण्ड में
रोष आज व्याप्त है
समाजवाद  कुचक्र
देख क्षुब्ध हैं सभी ।।---2

सहस्र जयचंद हैं
लोभियों के संग है
सभी का सर विच्छेद कर
राष्ट्र को बचा अभी।।।---3

हाथ में त्रिशूल हो
चक्र गदा शूल होल।
पापियों का नाश कर
धर्म का प्रसार कर ।।---4

'मार्तण्ड'™ से भी तीव्र
दैदीप्यमान हो
सर्व शक्तिमान हों
कार्य यूँ करे सभी ।।---5

अखंड आर्यवर्त की
सनातने परम्परा
प्रथम पूज्य मातृ तुल्य
जननी भारती नमः।।---6

राष्ट्रवादी कवि
रजनीश 'मार्तण्ड'
9455502007



Thursday, 15 December 2016

शेर

जिसे देकर हवाएँ भी रुख बदल लेती हैं
जिसके आते ही लहरें भी दम तोड़ देती हैं ।
तुम वो जो घरौंदों में बंधी भेंड़ बकरी हो
हमारी दहसत से खुले शेर भी मांद ढूंढ लेते हैं।।

Thursday, 20 October 2016

दम


बड़ी गर्दिशों में काटे हैं हमने पिछले कई साल
आज काल सितारे भी मेरा हाल लिया करते हैं ।
बडे नाज से इतराता रहा कल चाँद मेरी हवेली पर
कैसे बताएं 'मार्तण्ड' यहाँ दरबार किया करते हैं ।।


मार्तण्ड

आशमान के ऊपर सितारों से ये पैगाम आने  आने लगे हैं
घर की ड्योढ़ी जरा ऊँची रखना आज कल मेरे घर में फरिस्ते भी आने जाने लगे हैं

बड़ी गर्दिशों में काटे हैं हमने पिछले कई साल
आज काल चाँद सितारे भी दरबार किया करते हैं