Tuesday, 30 May 2017

शेर

बड़ी गर्दिशों में काटे हैं हमने पिछले कई साल
आज कल सितारे भी मेरा हाल लिया करते हैं ।
बडे नाज से इतराता रहा कल चाँद मेरी हवेली पर
कैसे बताएं 'मार्तण्ड' मेरे यहाँ दरबार किया करता है।।
मार्तण्ड

शेर

निकल पड़े हैं शहजादे आज समर में
तब लौटगे जब दुश्मन पड़े होंगे कबर में ।

शेर

मेरा महकूम दिल तेरे महकमे का आदी है
गुलामगर्दिश में फिर भी रात सो न सका ।

मार्तण्ड

शेर

बड़े दिन बाद आज आ गए कैसे
दिल तो महरूम था उसे भा गए कैसे
मार्तण्ड

शेर

चेहरे पर उम्र का तकाजा कैसा
दिल अभी जवान है शहजादेजैसा